प्रस्तावना: अनानास की खेती – एक कैश क्रॉप- कम जोखिम और ज़्यादा मुनाफा- Pineapple cultivation – a cash crop – offers low risk and high profits.
अनानास (Pineapple) दुनिया भर में अपने अनोखे स्वाद और खुशबू के लिए जाना जाता है। भारत में अनानास की खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, असम, केरल, त्रिपुरा और महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में की जाती है। लेकिन अब आधुनिक तकनीकों के कारण इसे अन्य राज्यों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है। अनानास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक “काटक” फसल है, यानी इस पर कीटों और बीमारियों का हमला बहुत कम होता है। २०२६ के बाजार में जूस, जैम और डिब्बाबंद फल (Canned Fruits) उद्योग के कारण अनानास की मांग चरम पर है।
भारत में फलों की खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम बनती जा रही है। पारंपरिक फसलों के मुकाबले फल-फसलों में कम जोखिम और ज़्यादा मुनाफा देखने को मिलता है। इन्हीं फसलों में से एक है अनानास (Pineapple)।
अनानास की मांग सिर्फ ताजे फल के रूप में ही नहीं बल्कि:
- जूस उद्योग, जैम व प्रोसेसिंग यूनिट, होटल और कैटरिंग और निर्यात बाजार
में भी लगातार बढ़ रही है। सही तकनीक और योजना के साथ की गई अनानास की खेती किसान को लंबे समय तक स्थिर आय दे सकती है।
अनानास क्या है?- What is a pineapple?
अनानास एक उष्णकटिबंधीय बहुवर्षीय फल फसल है।
यह पौधा एक बार लगाने के बाद 2–3 वर्षों तक फल देता है। इसकी खेती कम पानी में भी की जा सकती है और रखरखाव अपेक्षाकृत आसान होता है।
१. अनानास की खेती के प्रमुख लाभ- Major benefits of pineapple cultivation
- उच्च रिटर्न: एक बार निवेश करने पर आप २-३ साल तक पैदावार ले सकते हैं।
- कम जोखिम: यह फसल खराब मौसम और कीटों के प्रति अधिक सहनशील है।
- अंतर-फसल (Intercropping): नारियल, सुपारी या रबर के बागानों के बीच में खाली जगह का उपयोग करने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है।
- अनानास की खेती बगीचे में नमी बनाए रखने के लिए आप बगीचे के किनारे आप [ड्रैगन फ्रूट की खेती 2026 पूरी जानकारी, लागत, मुनाफ़ा और सरकारी योजनाएँ] लगाकर अपनी आय दोगुनी करें।
२. जलवायु और मिट्टी का चयन- Climate and soil selection
- जलवायु: अनानास एक उष्णकटिबंधीय (Tropical) फल है। इसे १५°C से ३२°C का तापमान और अधिक वर्षा वाले क्षेत्र पसंद हैं। नमी वाली हवा इसके विकास के लिए बहुत जरूरी है।
- मिट्टी: अनानास के लिए रेतीली दोमट या मध्यम काली मिट्टी सबसे अच्छी होती है। मिट्टी का पीएच (pH) ५.० से ६.० के बीच होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए, अन्यथा जड़ें सड़ सकती हैं।
३. उन्नत किस्में-Improved Varieties

अनानास की खेती में मुनाफे के लिए सही किस्म का चुनाव करना बहुत जरूरी है:
- जायंट क्यू (Giant Kew): यह प्रसंस्करण (Processing) के लिए सबसे अच्छी किस्म है। इसके फल बड़े होते हैं और इनमें रस अधिक होता है।
- क्वीन (Queen): यह ताजे फल के रूप में खाने के लिए प्रसिद्ध है। इसके फल छोटे लेकिन बहुत मीठे और सुनहरे पीले होते हैं।
- मॉरीशस (Mauritius): यह किस्म जल्दी तैयार होती है और इसकी भंडारण क्षमता (Shelf-life) अच्छी होती है।
एक एकड़ अनानास की खेती की लागत (अनुमानित २०२६)- The cost of cultivating one acre of pineapples (estimated 2026)
| विवरण | मात्रा | अनुमानित लागत (₹) |
| रोपण सामग्री (Suckers/Slips) | १८,००० नग | ₹५५,००० – ६५,००० |
| खेत की तैयारी और बेड निर्माण | १ एकड़ | ₹२०,००० |
| खाद और उर्वरक (१८ माह) | — | ₹४५,००० |
| ड्रिप सिंचाई सेटअप | १ एकड़ | ₹३०,००० |
| मजदूरी और अन्य खर्च | — | ₹३०,००० |
| कुल लागत | — | ₹१.८० लाख – २.१० लाख |
४. रोपण की विधि और तकनीक- Planting methods and techniques
अनानास की खेती में अनानास के बीज नहीं होते, इसे पौधे के ही अंगों से उगाया जाता है:
- सकर्स (Suckers): ये पौधे के आधार से निकलते हैं। इनसे १५-१६ महीने में फल मिल जाते हैं।
- स्लिप्स (Slips): ये फल के नीचे डंठल से निकलते हैं। इनसे १८-२० महीने लगते हैं।
- क्राउन (Crown): यह फल के ऊपर का हिस्सा होता है। इससे फल आने में २ साल तक लग सकते हैं।
- रोपण दूरी: दो कतारों के बीच ६० सेमी और दो पौधों के बीच ३० सेमी की दूरी रखें। एक एकड़ में १५,००० से १८,००० पौधे लगाना आदर्श है।
५. खाद और जल प्रबंधन- Fertilizer and water management
अनानास को नाइट्रोजन और पोटाश की बहुत अधिक आवश्यकता होती है।
- खाद: प्रति पौधा १० ग्राम नाइट्रोजन, ५ ग्राम फास्फोरस और १० ग्राम पोटाश की आवश्यकता होती है। इसे ३-४ किस्तों में देना चाहिए।
- सिंचाई: अनानास को बहुत ज्यादा पानी नहीं चाहिए, लेकिन मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए। ड्रिप सिंचाई का उपयोग करें ताकि पानी जड़ों के पास ही गिरे। गर्मियों में १०-१२ दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।
- आज के दौर में कोई भी फसल हो सिंचाई बिना सफल नही हो सकती, सिंचाई को विस्तृत समझने के लिएं[ड्रिप सिंचाई के फायदे: कम पानी में अधिक उत्पादन का रहस्य2025] जरूर पढे.
६. फूलों के लिए हार्मोन का प्रयोग- Using hormones for flowers
अनानास की खेती में अनानास में प्राकृतिक रूप से फूल अलग-अलग समय पर आते हैं, जिससे कटाई में दिक्कत होती है।
- उपाय: ‘इथरेल’ (Ethrel) का छिड़काव करने से सभी पौधों में एक साथ फूल आते हैं। १० पीपीएम (PPM) घोल का उपयोग ३०-४० पत्तियों की अवस्था में करना चाहिए।
अनानास की खेती का समय चक्र- Pineapple cultivation time cycle
| माह | मुख्य गतिविधि | महत्वपूर्ण टिप्पणी |
| १ – २ | रोपण और जड़ पकड़ना | खरपतवार निकालें |
| ४ – ८ | पत्तियों की तेज वृद्धि | नाइट्रोजन युक्त खाद दें |
| १० – १२ | हार्मोन का छिड़काव | फूलों को प्रेरित करें |
| १५ – १८ | फल का पकना | धूप से बचाने के लिए पुआल से ढकें |
७. रोगों और कीटों से सुरक्षा- Protection from diseases and pests
अनानास की खेती में अनानास पर बीमारियां कम आती हैं, फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- हार्ट रॉट (Heart Rot): यह फंगस के कारण होता है। इससे बचने के लिए पौधों को बोर्डो मिश्रण (Bordeaux Mixture) से उपचारित करें।
- मीली बग (Mealy Bug): ये कीड़े पत्तियों का रस चूसते हैं। नीम के तेल का छिड़काव इसके लिए प्रभावी है।
- सन बर्निंग: तेज धूप से फल खराब हो सकते हैं। फलों को सूखे पत्तों या घास से ढक देना चाहिए।
- कीट एवं रोग नियंत्रण के बारे मी सविस्तर जानकारी के लिएं हमारा लेख [कीट प्रबंधन 2025 सफल खेती के लिए एकीकृत तकनीक और सरकारी योजनाएँ] जरूर पढे.
८. मुनाफे का विश्लेषण-Profit & ROI
- उत्पादन: एक एकड़ से ३० से ४० टन अनानास की पैदावार होती है।
- विक्री मूल्य: बाजार में थोक भाव ₹२० से ₹३० प्रति किलो तक मिलता है।
- कुल आय: ३५ टन x ₹२५ (औसत) = ₹८,७५,०००।
- शुद्ध मुनाफा: ८.७५ लाख – २.१० लाख (लागत) = ₹६,६५,००० प्रति एकड़।
- नोट: अगले साल लागत और भी कम हो जाती है क्योंकि आप अपने ही खेत के सकर्स का उपयोग कर सकते हैं।
९. कटाई और मार्केटिंग-Harvesting & Marketing

- कटाई: जब फल का निचला हिस्सा २५% पीला हो जाए, तब उसे तोड़ लें। यदि दूर भेजना है तो थोड़ा कच्चा ही तोड़ें।
- ग्रेडिंग: फलों को उनके वजन और आकार के अनुसार अलग करें। बड़े फलों को सीधे रिटेल मार्केट या एक्सपोर्ट के लिए भेजें।
- निर्यात: भारत से दुबई, सऊदी अरब और ओमान में अनानास की भारी मांग है।
१०. अनानास की सघन खेती-High Density Planting
अनानास की खेती में अगर आप मुनाफा बढ़ाना चाहते हैं, तो “हाई डेंसिटी” तकनीक अपनाएं। इसमें एक एकड़ में २०,००० से २५,००० पौधे लगाए जाते हैं। हालांकि इसमें खाद की जरूरत बढ़ जाती है, लेकिन उत्पादन ५० टन प्रति एकड़ तक पहुँच सकता है।
११. मूल्य संवर्धन-Value Addition
ताजे फल बेचने के अलावा, आप अनानास से निम्नलिखित उत्पाद बनाकर आय बढ़ा सकते हैं:
- अनानास के स्लाइस (Canned Slices): चीनी की चाशनी में पैक करके।
- जूस और पल्प: जूस कंपनियों को सप्लाई करके।
- अनानास का फाइबर: अनानास की पत्तियों से बहुत मजबूत रेशा (Fiber) निकाला जाता है, जिसका उपयोग कपड़ा उद्योग में होता है।
१२. रैटूनिंग (Ratooning) – एक बार लगाओ दो बार पाओ- Ratooning – Plant once, harvest twice.
अनानास की खेती में पहली कटाई के बाद मुख्य पौधे को हटा दें और बगल से निकलने वाले सकर्स को बढ़ने दें। इसे ‘खोडवा’ या ‘रैटून’ फसल कहते हैं। इसमें रोपण की लागत शून्य होती है और मुनाफा पहले साल से भी अधिक मिलता है।
निर्यात के लिए ग्रेडिंग मानदंड- Grading criteria for exports
| ग्रेड | वजन (किलो) | उपयोग |
| ए (A) | १.५ किलो से ऊपर | अंतरराष्ट्रीय निर्यात |
| बी (B) | १.० – १.५ किलो | स्थानीय सुपरमार्केट |
| सी (C) | १.० किलो से कम | जूस और जैम फैक्ट्री |
१३. सरकारी योजनाएं और सब्सिडी २०२६- Government schemes and subsidies 2026
भारत सरकार राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के माध्यम से अनानास की खेती के लिए ४०% तक सब्सिडी प्रदान करती है। ड्रिप सिंचाई के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ८०-९०% तक की छूट मिल सकती है। अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क कर इसके लिए आवेदन जरूर करें।
- Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) https://midh.gov.in
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) https://pmksy.gov.in
- राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHB) https://nhb.gov.in/
- राज्य बागवानी अनुदान योजनाएँ
इन योजनाओं से 40–60% तक सब्सिडी मिल सकती है।
१४. सफल किसान के लिए ‘प्रो-टिप्स’- ‘Pro-tips’ for a successful farmer
१. नमी का ध्यान रखें: अनानास की जड़ों में पानी खड़ा नहीं होना चाहिए, इसलिए ऊंचे बेड (Raised Beds) का ही उपयोग करें।
२. खरपतवार नियंत्रण: शुरुआत के ६ महीने खेत को साफ रखें, क्योंकि खरपतवार अनानास का पोषण छीन लेते हैं।
३. मिट्टी परीक्षण: रोपण से पहले मिट्टी की जांच करवाएं और कमियों को पूरा करें।
४. मार्केट रिसर्च: फसल तैयार होने से २ महीने पहले ही स्थानीय व्यापारियों या कंपनियों से संपर्क करें।
निष्कर्ष- conclusion
अनानास की खेती २०२६ के आधुनिक युग में किसानों के लिए एक टिकाऊ और लाभदायक विकल्प है। इसमें थोड़ी मेहनत और धैर्य (१८ महीने) की आवश्यकता है, लेकिन जो मुनाफा मिलता है वह किसी भी पारंपरिक खेती से कहीं अधिक है। यदि आप इसे सही मैनेजमेंट और मार्केटिंग के साथ करते हैं, तो अनानास आपके खेत के लिए ‘पीला सोना’ साबित होगा।
यदि आप निरंतर लाभ देने वाले कृषि व्यवसायों के बारे में जानना चाहते हैं, तो इस लेख को अवश्य पढ़ें — “[स्ट्रॉबेरी खेती भारत में कितना फायदा है? पूरा मार्गदर्शन 2026]”
अनानास की खेती उन किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प है जो पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर फल-कृषि में स्थिर और अधिक आय चाहते हैं। सही किस्म, जलवायु, सिंचाई और बाजार प्रबंधन के साथ अनानास की खेती लाभ का सौदा बन सकती है।
अगर आप अनानास की खेती (Pineapple Farming) कि पुरी जानकारी मराठी मे पढना चाहते तो आप यह विस्तृत मार्गदर्शन जरूर पढे – [अननस शेती संपूर्ण मार्गदर्शक एकरी ५ ते ७ लाखांपर्यंत कमाई कशी करावी?2026]
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